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प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी और तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है- प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोसी रेल मेगाब्रिज समेत रेलवे की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का किया शुभारंभ, कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री ऽ कोसी महासेतु से मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों की समस्याएं दूर होंगी। यह तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी और तत्कालीन रेलमंत्री श्री नीतीश कुमार जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है- प्रधानमंत्री ऽ श्री नीतीश कुमार जी की सरकार बनने से पहले बिहार में इक्का-दुक्का मेडिकल कॉलेज थे। अब बिहार में 15 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं- प्रधानमंत्री ऽ शुरुआती वर्षों में ही श्री नीतीश कुमार जी की सरकार ने बिहार में किसानों के हित में ए0पी0एम0सी0 (.षि उपज बाजार समिति) एक्ट को हटा दिया था। जो काम बिहार ने कर दिखाया आज पूरा देश उसी मार्ग पर चल पड़ा है- प्रधानमंत्री ऽ दृढ़ निश्चय हो और श्री नीतीश कुमार जी जैसा साथी हो तो क्या कुछ संभव नहीं है- प्रधानमंत्री ऽ लॉकडाउन के दौरान राज्य से बाहर फंसे लोगों को वापस लाने में रेलवे ने सबसे अहम और महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी-मुख्यमंत्री ONE NEWS NETWORK BIHAR SAMASTIPUR 18 सितम्बर 2020 :- प्रधानमंत्री श्री नरेंद...

नीतीश की राजनीतिक कुशलता, जटिलता और बिहार की विरासत

नीतीश की राजनीतिक कुशलता, जटिलता और बिहार की विरासत ONE NEWS NETWORK BIHAR SAMASTIPUR बिहार के राजनीति नीतीश को दो फ्रंट से हमले झेलने पड़ते है. यह अधिक बड़ी चुनौती है. उन्हें उग्र हिंदुत्व से भी लड़ना पड़ता है और लालू परिवार को भी निपटाना पड़ता है. नीतीश कुशल राजनेता की तरफ फ्रंट से जुबानी हमले कम ही करते है. इस काम के लिए उनके प्रवक्ता कोई कसर बाकी नहीं रखते है. बंगाल की राजनीति में ज्योति बसु जब मुख्यमंत्री थे तब ममता बनर्जी को ‘वो लड़की’ कहकर ही संबोधित करते थे. मतलब अधिक गंभीरता से नहीं लेते थे. बिहार में नीतीश कुमार तेजस्वी को सदन में ‘सुनो बाबू’ कह चुके है.. और अब भी ‘क्या-क्या बोलता रहता है, उसको कुछ पता है’ जैसे लफ्जों से इग्नोर कर देते है. राजनीति में यह गंभीरता शायद ही मौजूदा दौर के किसी नेता में है. यूँ कहे कि अपने विरोधी को ऊँगली पर कैसे घुमा देते है, यह नये दौर के लोगों को सिखने की जरुरत है. नीतीश 1989 में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बन चुके थे. समता पार्टी के बैनर तले 1995 में अकेले चुनाव लड़ कर 7 सीट जीते थे. जबकि कुर्मी चेतना रैली 1994 में हुई थी. जिसकी भीड़ का सम्पूर्ण क्रां...