नीतीश की राजनीतिक कुशलता, जटिलता और बिहार की विरासत
नीतीश की राजनीतिक कुशलता, जटिलता और बिहार की विरासत ONE NEWS NETWORK BIHAR SAMASTIPUR बिहार के राजनीति नीतीश को दो फ्रंट से हमले झेलने पड़ते है. यह अधिक बड़ी चुनौती है. उन्हें उग्र हिंदुत्व से भी लड़ना पड़ता है और लालू परिवार को भी निपटाना पड़ता है. नीतीश कुशल राजनेता की तरफ फ्रंट से जुबानी हमले कम ही करते है. इस काम के लिए उनके प्रवक्ता कोई कसर बाकी नहीं रखते है. बंगाल की राजनीति में ज्योति बसु जब मुख्यमंत्री थे तब ममता बनर्जी को ‘वो लड़की’ कहकर ही संबोधित करते थे. मतलब अधिक गंभीरता से नहीं लेते थे. बिहार में नीतीश कुमार तेजस्वी को सदन में ‘सुनो बाबू’ कह चुके है.. और अब भी ‘क्या-क्या बोलता रहता है, उसको कुछ पता है’ जैसे लफ्जों से इग्नोर कर देते है. राजनीति में यह गंभीरता शायद ही मौजूदा दौर के किसी नेता में है. यूँ कहे कि अपने विरोधी को ऊँगली पर कैसे घुमा देते है, यह नये दौर के लोगों को सिखने की जरुरत है. नीतीश 1989 में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बन चुके थे. समता पार्टी के बैनर तले 1995 में अकेले चुनाव लड़ कर 7 सीट जीते थे. जबकि कुर्मी चेतना रैली 1994 में हुई थी. जिसकी भीड़ का सम्पूर्ण क्रां...